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सफलता के लिए जानिए श्रीकृष्ण के ये 11 सूत्र

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भगवान कृष्ण ने गीता के माध्यम से संसार को जो शिक्षा दी, वह अनुपम है। वेदों का सार है उपनिषद और उपनिषदों का सार है ब्रह्मसूत्र और ब्रह्मसूत्र का सार है गीता। सार का अर्थ है निचोड़ या रस। गीता में उन सभी मार्गों की चर्चा की गई है जिन पर चलकर मोक्ष, बुद्धत्व, कैवल्य या समाधि प्राप्त की जा सकती है। दूसरे शब्दों में कहें तो जन्म-मरण से छुटकारा पाया जा सकता है। तीसरे शब्दों में कहें तो खुद के स्वरूप को पहचाना जा सकता है। चौथे शब्दों में कहें तो आत्मज्ञान प्राप्त किया जा सकता है और पांचवें शब्दों में कहें तो ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है।   आओ जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण के वे रहस्यमय सूत्र जिन्हें जानकर आपको लगेगा कि सच में यह बिलकुल ही सच है। निश्‍चित ही उनके ये सूत्र आपके जीवन में बहुत काम आएंगे। जीवन में सफलता चाहते हैं ‍तो गीता के ज्ञान को अपनाएं और निश्‍चिंत तथा भयमुक्त जीवन पाएं। 1. सफलता :   भगवान श्रीकृष्‍ण कहते हैं कि यदि आप लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहते हैं, तो अपनी रणनीति बदलें, लक्ष्य नहीं। ...इस जीवन में न कुछ खोता है, न व्यर्थ होता ह...

क्या आप जानते हैं श्रीकृष्ण में कौन से 64 गुण थे

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भक्तिरसामृतसिन्धु में भगवान् "श्री कृष्ण" के  64 गुण  बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं - (1) सम्पूर्ण शरीर का सुन्दर स्वरूप (2 )समस्त शुभ गुणों से अंकित (3) अतिव रूचिर (4)तेजवान (5) बलवान (6) नित्य युवा (6) अद्भुत भाषाविद् (8) सत्यवादी (9) मधुर भाषी (10) वाक् पटु (11) सुपण्डित (12)अत्यधिक बुद्धिमान् (13) प्रतिभावान् (14 ) विदग्ध (15) अतिव चतुर (16) दक्ष (17) कृतज्ञ (18) दृढ़संकल्प (19) काल तथा परिस्थियों के कुशल निर्णायक (20) वेदों या शास्त्रों के आधार पर देखने एवं बोलने वाले (21) पवित्र (22) आत्मसंयमी (23) स्थिर (24) सहिष्णु (25) क्षमावान् (26) गंभीर (27) धैर्यवान् (28) समदृष्टि रखने वाले (29) उदार (30) धार्मिक (31) शूरवीर (32) दयालु (33) सम्मान करने वाले (34) भद्र (35) विनयी (36) लज्जावान् (37) शरणागत पालक (38) सुखी (39) भक्तों के हितैषी (40) प्रेमवश्य ALSO READ: जब श्रीकृष्ण ने दिया राधारानी को शाप, पढ़ें अनूठी कथा (41) सर्वमंगलमय (42) परम शक्तिमान् (43) परमयशस्वी (44) लोकप्रिय (45) भक्तों का पक्ष लेने वाले (46) समस्त स्त्रियों के लिए अत्यधिक आकर्षक (47) सर्व आराध्य...

जानिए पांडवों ने वन में क्या देखा और श्री कृष्ण ने क्या जवाब दिया.........

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1.युधिष्ठिर ने क्या देखा? :  पांचों भाई जब वन में रहने लगे तो एक बार चारों भाई अलग-अलग दिशाओं में वन भ्रमण को निकले। युधिष्ठिर भ्रमण पर थे तो उन्होंने एक जगह पर देखा कि किसी हाथी की दो सूंड है। यह देखकर युधिष्ठिर के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।   2.अर्जुन ने क्या देखा?  : अर्जुन दूसरी दिशा में भ्रमण पर थे। कुछ दूर जंगल में जाने पर उन्होंने जो देखा उसे देखकर वे आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने देखा कि कोई पक्षी है, उसके पंखों पर वेद की ऋचाएं लिखी हुई हैं, पर वह पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा है।   3.भीम ने क्या देखा? :  दोनों भाइयों की तरह भीम भी भ्रमण पर थे। भीम ने जो देखा वह भी आश्चर्यजनक था। उन्होंने देखा कि गाय ने बछड़े को जन्म दिया है। जन्म के बाद वह बछड़े को इतना चाट रही है कि बछड़ा लहुलुहान हो गया। 4.सहदेव ने क्या देखा? :  सहदेव जब भ्रमण पर थे तो उन्होंने चौथा आश्चर्य देखा कि 6-7 कुएं हैं और आसपास के कुओं में पानी है किंतु बीच का कुआं खाली है। बीच का कुआं गहरा है फिर भी पानी नहीं है। उन्हें यह देखकर घोर आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैस...